‘वक्फ (संशोधन) विधेयक पर आर-पार

वक्फ संशोधन विधेयक: वक्फ (संशोधन) वक्फ 2025 रविवार को संसद में पेश किया गया। मंत्री किरण रिजिजू ने वक्फ संशोधन विधेयक सोमवार को पेश किया। संसद भवन के अंदर बिल पर चर्चा जारी है। खूब शोर-शराबा हो रहा है. मंत्री किरेन रिजिजू एसोसिएट पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन प्लास्टिक दल के सदस्य खूब हो-हल्ला कर रहे हैं। किरण रिजिजू ने कहा कि 2013 में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने संसद की जो इमारत बनाई थी, उसे भी वक्फ की मान्यता घोषित कर दी थी। अगर नरेंद्र मोदी जी की सरकार नहीं थी, हमने संशोधन नहीं किया, तो हम जिस जगह बैठे हैं, वह भी वक्फ की संपत्ति है। बिजनेसमैन की सरकार होती है, तो पता नहीं कितनी संपत्ति होती है।
किरेन रिजिजू का कहना है कि अगर बक्फ संशोधन बिल सदन में नहीं लाया गया, तो वक्फ यह भी कह सकता है कि संसद भवन भी वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। इसी तरह कई संपत्तियों पर वक्फ अपना हक जमाता है, लेकिन हम ऐसा नहीं कर पाए। इस दौरान किरण रिजिजू ने केरल, इलाहबाद और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड में शिया, सुन्नी भी बचे, पिछड़े लोग भी बचे, बेकार और औरतें भी। वक्फ बिल किसी भी धर्म के विरुद्ध नहीं है। सरकारी मस्जिद के प्रबंधन में भी पास नहीं बीवी। साथ ही मुसलमानों के दान से भी सरकार को कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे अधिक संख्या में आज तक किसी भी बिल पर लोगों की फाइलें नहीं आई हैं। 284 प्रतिनिधिमंडल ने अलग-अलग समिति के समक्ष अपनी बात रखी है। 25 राज्यों के वक्फ बोर्ड ने अपना पक्ष रखा है।
वैश्वीकरण, वैश्वीकरण ने भी अपनी बात समिति के सामने रखी हैं। बिल की सोच के साथ विरोध करने वाले भी समर्थन करेंगे। यह प्रस्ताव खुला मन से परीक्षण नोट के सामने पेश किया जा रहा है। 1930 में अधिनियम लाया गया था। आज़ादी के बाद 1954 में पहली बार वक्फ अधिनियम बना और उसी में राज्य के बोर्ड का भी प्रस्ताव रखा गया। 1995 में व्यापक रूप से अधिनियम बनाया गया। उस समय किसी ने इसे असंवैधानिक, नियमविरुद्ध नहीं कहा था कि आज हम जब ये बिल ला रहेंगे, तो ये बात का कोई विचार कैसे आया, किस बिल में लेना-देना नहीं है, उसे लेकर आपने लोगों को अनाड़ी करने का काम किया। 1995 में ट्रिब्यूनल का समझौता हुआ।