April 4, 2025

दिन के तीन पहरों में रूप बदलती है ज्ञान की देवी मां शारदा

0
Man Sharada

जालौन। बुंदेलखंड के जालौन जिले में ज्ञान की देवी मां शारदा का ऐसा मंदिर है जिसके बारे में मान्यता है कि एक कुंड से प्रकट हुईं आदि शक्ति दिन के तीन पहरों में अलग अलग रुपों में अपने भक्तों को दर्शन देती हैं। जिला मुख्यालय उरई से लगभग 30 किमी दूर ग्राम बैरागढ़ में स्थित इस मंदिर में ज्ञान की देवी सरस्वती मां शारदा के रूप में विराजमान हैं। किवदंतियों के अनुसार, यह मंदिर आदिकाल में निर्मित हुआ था और मां शारदा की मूर्ति मंदिर के पीछे बने एक कुंड से निकली थी। इस कारण इस स्थान को शारदा देवी सिद्ध पीठ कहा जाता है। मान्यता है कि देवी प्रतिमा दिन में तीन रूपों में दिखती है, सुबह के समय कन्या के रूप में, दोपहर को युवती के रूप में और शाम को मां के स्वरूप में। इन अद्भुत दर्शनों के लिए श्रद्धालु पूरे देश से यहां आते हैं।

पुजारी शारदा शरण द्विवेदी ने बताया कि मंदिर प्रांगण में पाखर का वृक्ष नवरात्र के समय हरा भरा हो जाता है जहां श्रद्धालु पेड़ के नीचे तप और ध्यान भी करते हैं। भक्त मानते हैं कि पेड़ के नीचे बैठकर जो अपनी मन्नत होती है वह पूर्ण होती है। मां शारदा शक्ति पीठ ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पृथ्वीराज चौहान और आल्हा-उदल के युद्ध की साक्षी रही है। ग्यारहवीं सदी में बुंदेलखंड के तत्कालीन चंदेल राजा परमर्दिदेव (राजा परमाल) पर पृथ्वीराज चौहान ने आक्रमण किया था। उस समय चंदेलों की राजधानी महोबा थी और आल्हा-उदल राजा परमाल के मंत्री होने के साथ-साथ वीर योद्धा भी थे। बैरागढ़ के युद्ध में आल्हा-उदल ने पृथ्वीराज चौहान को बुरी तरह परास्त कर दिया था। कहा जाता है कि आल्हा और उदल मां शारदा के उपासक थे, और मां शारदा ने आल्हा को यह वरदान दिया था कि उन्हें युद्ध में कोई नहीं हरा सकेगा। उदल की मृत्यु के बाद, आल्हा ने पृथ्वीराज चौहान से अकेले युद्ध किया और विजय प्राप्त की। विजय के प्रतीक स्वरूप आल्हा ने मां शारदा के चरणों के पास अपनी सांग (युद्ध भाला) गाड़ दी थी। यह सांग इतनी गहरी गड़ी हुई थी कि पृथ्वीराज चौहान भी इसे निकाल नहीं पाए और न ही इसकी नोक को सीधा कर सके। इसके बाद आल्हा ने युद्ध से संन्यास लेकर बैराग ले लिया और तभी से इस स्थान का नाम बैरागढ़ पड़ा आज भी मंदिर के मठ के ऊपर आल्हा द्वारा गाड़ी गई 30 फीट ऊंची सांग विद्यमान है, और इसका अधिकांश भाग जमीन के अंदर धंसा हुआ है। यह सांग इस मंदिर की प्राचीनता और ऐतिहासिकता का प्रतीक है। देश में मां शारदा के ऐसे केवल दो प्रमुख मंदिर हैं जिसमें एक बैरागढ़ में और दूसरा मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर में स्थित है। बैरागढ़ माता शारदा मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर अपनी साधारण नक्काशी और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के पीछे स्थित एक प्राचीन कुंड को लेकर मान्यता है कि इसमें स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है। इसी आस्था के कारण बड़ी संख्या में भक्त यहां स्नान करने आते हैं और दूर-दूर से श्रद्धालु इस पवित्र स्थल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर का वातावरण अत्यंत रमणीय और भक्तिमय रहता है। यहां विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। दशमी के दिन भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। भक्तजन जवारे लेकर माता के चरणों में अर्पित करते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *